Friday, July 18, 2008

नशे का पैगाम आपके नाम


आज बड़ा दुःख है मुझ को, की कोई नहीं पहचानता
मै आज भी वही हूँ जो मै कल था
बस रूप बदल गया है रंग बदल गया है
जो मै करता था आज भी करता हूँ
जो मै कहता था आज भी कहता हूँ
बस नाम बदल गया है दाम बदल गया है

इस फैशन के अफरातफरी में मै भी पूजा जाता हूँ
लेकिन आज बडा दुःख है मुझको की कोई नहीं पहचानता
जान ले ये कलमनुष तू जिसने भी मुझको गले से है लगाया
पास खडी वहीं मृत्यू को ही पाया,मृत्यू को ही पाया

कहा गये वो नैन तुम्हारे जो मुझको धित्कारा करते थे
दूर से ही मेरी पहचान जान लिया करते थे
खो गया है अस्तित्वा तुम्हारा अरे मुझको क्या पहचानो गे
आज मै फिर से तुमको आपनी पहचान बतलाता हूँ
पल में नाश करू पल में मृत करू नशा मै कहलाता हूँ

Friday, January 25, 2008

Saturday, January 19, 2008

नही रहा अब पहले जैसा

नही रहा अब पहले जैसा
सुन्दर सुघर सलोना
वह झरनों का झरना
कल कल बहती नदिया
और कोयल का कुकना
नही रहा अब पहले जैसा
सुन्दर सुघर सलोना

मेरा बचपन कल का खेल खिलौना
कभी झाडियों मी छुप इधर उधर मडराना
कभी खेतो की मेढो पर मटर की फलिया खाना
गहू की वे बाले यू हवा मी लहराना
नही रहा अब पहले जैसा
सुन्दर सुघर सलोना

गाव कि गोरी जाती पनघट
कुछ कूए पर बैठी करती खटपट
कही दूर बैलो कि घंटी
बजती जैसे दुल्हन की पायल
तरूनो को उसकी आवाजे
विरहन सी करती घायल
नही रहा अब पहले जैसा
सुन्दर सुघर सलोना

नीम डाल पर लगा हिडोला युवती गाना गाती
भोला बैठा उच् मचान उसकी बंसी मधुर है बजती
राम राम कह लाला जी धन का ऐठ दिखाते
नही रहा अब पहले जैसा
सुन्दर सुघर सलोना

गाव के मुखिया वंसी काका दया धरम की मूरत
जैसा उनका सबसे प्रेम भाव उतनी सुंदर शिरत
रोज सवेरे उठ कर भैया अखाडे मे है जाते
उतर कमीज खुटी पर दो सौ दंड लगाते
नही रहा अब पहले जैसा
सुन्दर सुघर सलोना

मिट्टी की खुशबू सोंधी सोंधी देती हमको सोना
नही रहा अब पहले जैसा यही तो है अब रोना
प्रेम भाव और भाई चारा लगता है अब सपना
हर गली मोहल्ला मी अब मारा मरी पड़ता है अब सुनना
नही रहा अब पहले जैसा
सुन्दर सुघर सलोना