एक जिंदगी थी, जिसे बहुत ही सुंदर बनाया गया था। जब वो इस जग में आई तो बहुत ही खुस दिखाई दे रही थी। उस पर न ही किसी का बोझ था और नही डर, वो तो इस जग में आजाद थी और इस जग में जीवन रूपी प्रेम को बटोर रही थी। उसे क्या पता था की ये उसका दीवाना पन ,सीधापन उसे घोर विपदा में ला फसायेगा ।
एक दिन की बात है। जिन्दगी सुबह मर्म बेला नदी के किनारे टहल रही थी और वहा के प्रकृति का मज़ा ले रही थी, की उतने में वहा ना जाने कहा से एक चंचल मन आगया,
और जिंदगी को वहा टहलते देख हस पड़ा। ये सब देख जिंदगी बड़े कोमल भाव से बोली -- क्यो भाई ऐसे क्यो हस रहे हो भला यहाँ कोई हसने की बात हुई है क्या ?
मन -- नही नही यहाँ हसने की बात नही हुई, मै तो यह देख कर हस रहा हूँ की भला कोई इन निर्जन वादियों को देख कर कैसे खुश हो लेता है, हूँ ..... ये भी कोई मज़ा लेने की जगह है ,
मन की इन बातो को सुनकर जिंदगी बड़ी सरलता से बोली तब कहा मज़ा मिलता है । क्या तुम मुझे बताओगे ??
जिंदगी यह नही जानती थी की वो यह सवाल पूछ कर अपने को बहुत बड़े संकट में डालने जारही है । जिंदगी के सवाल को सुनते ही मन ने उत्तर दिया क्यो नही जरुर लेकिन तुम्हे मुझसे एक वादा करना होगा,
जिंदगी - वोक्या
मन- यह की तुम्हे वहा मेरे साथ चलना पड़ेगा
जिंदगी - हा बाबा मै तुम्हारे साथ ही चलूंगी , अबतो बताओ कहा है वो जगह ,
जिंदगी को अपने वोर खिचता देख मन की आँखे चमक उठी और उसने अपना हाथ उठा कर दुसरे ओर कीतरफ का इशारा किया
मन - उधर है वो जगह जहा पर संसार की सभी खुशिया ,सभी मज़े लुटते है ।
मन की चिकनी चुपडी बातो को सुनकर बोलो बेचारी सीधी सदी जिंदगी उसके चंगुल में फस चुकी थी और उसे अब उसी खुसी का सपना आरहा था जिसके बारे में मन ने उसे अभी अभी बताया था।
कुछा ही देर ठहरने के बाद मन ने जिंदगी से कहा चलो उस ओर चलते है ।
यह सुनकर जिंदगी भी खुश हो गई और मस्ती में झूमते हुवे बोली चलो , और वे दोनों एक तरफ़ निकल पड़ते है
जिंदगी को इसकी भनक भी नही लगी थी की आज जिसके बात को मान कर उसने पहल किया है वही उसको अपना गुलाम बना लेगा और उम्र भर अपनी बात को मनवाएगा इन सभी बातो से जिंदगी अंजन थी । उसी दिन से जिंदगी बेबस हो गयी है ,
लाचार हो गयी है वो,
मन उसे वहा ले जाकर सांसारिक भ्रम में ऐसे फसाया जहा का सुख मज़ा सब पैसा है । जहा सभी sukho आरामो को वहा पैसे से ख़रीदा जाता है। उस जगह पर ja कर जिंदगी सिर्फ़ मन की ही रह गयी । उसको मन अपने
isaro पर nachane लगा
हम उन बातॊं कॊ याद करेंगें जॊ हम अक्सर भुला दिया करते हैं। हम याद करेंगं उनकॊ जॊ यादॊ से ताजा हॊते है हम बात करेंगे उनकी जॊ यादॊं में ही खॊये रहते है
Sunday, April 19, 2009
Wednesday, April 8, 2009
Thursday, December 25, 2008
Wednesday, October 22, 2008
मै हूँ आनाड़ी
सुन री सखी मै क्या कहू
मै भावरा तू बावरी
जिस जगह देखू बाग में फूलो से सजी हर क्यारी
किस डाल पर मै लटकू ना समझ सका मै आनाड़ी
कोयल सी मीठी सब बोले
जब काम हो अपनी बारी
और कौवे सा करकस तब बोलें
जब आवे अपनी बारी
मैंने देखा सूरज को उगते
तो स्वर्ण किरण लागे प्यारी
वही सूरज जब ढलने जावे
तो दिखे रक्त से भरी क्यारी
सच है कया है झूठ है क्या
अपना कौन पराया क्या
मिथ्या क्या सच है क्या
मै सोच रहा बरी बरी
बस इतनी सी पहेली बुझादे तू
उलझी सी लड़ी सुलझादे तू
तू मेरी सखी मेधा प्यारी
ना जान सका ना समझ सका
अब तक भी, मै हूँ आनाड़ी
मै भावरा तू बावरी
जिस जगह देखू बाग में फूलो से सजी हर क्यारी
किस डाल पर मै लटकू ना समझ सका मै आनाड़ी
कोयल सी मीठी सब बोले
जब काम हो अपनी बारी
और कौवे सा करकस तब बोलें
जब आवे अपनी बारी
मैंने देखा सूरज को उगते
तो स्वर्ण किरण लागे प्यारी
वही सूरज जब ढलने जावे
तो दिखे रक्त से भरी क्यारी
सच है कया है झूठ है क्या
अपना कौन पराया क्या
मिथ्या क्या सच है क्या
मै सोच रहा बरी बरी
बस इतनी सी पहेली बुझादे तू
उलझी सी लड़ी सुलझादे तू
तू मेरी सखी मेधा प्यारी
ना जान सका ना समझ सका
अब तक भी, मै हूँ आनाड़ी
Wednesday, September 17, 2008
तेरी याद आजाती है
आज मैं फिर ब्लॉग खोल कर बैठा हूँ
कुछ लिखने का मन कहता है
कुछ कहने को मन कहता है
लेकिन क्या कहू कुछ याद नही आता??
चलिए मैं अपने यादों के झरोखे से कुछ कहता हु
आप को भीगी आंखों का एक
नजराना पेश करता हूँ
----------------------------------------------------
माँ तेरी याद आती है
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माँ तेरी याद आती है
मेरे दिल के तारों को छू जाती है
तुझसे मिलने को उकसा जाती है
तू जब रोज़ मुझे सपनो में जगाती है
माँ तेरी याद आजाती है
ऐसा तब क्यों न था
जब मै पास था तेरे
सायद तुझे महसूस कर न पाया था
तुझे दिल में टटोल न पाया था
तेरी जरूरत को समझ न पाया था
अब जब दूर हूँ तुझसे तो
माँ तेरी याद आती है
मेरे दिल के तारों को छू जाती है
जब मैं तुझ से बातों बातों में लड़ा करता था
हर बात पर रूठ जाया करता था
क्या पता था उस समय कि तुझसे
दूर इतना होजाऊंगा
कि तुझे याद करके भी ना रो पाउँगा
माँ तेरी याद आती है
मेरे दिल के तारों को छू जाती है
कुछ लिखने का मन कहता है
कुछ कहने को मन कहता है
लेकिन क्या कहू कुछ याद नही आता??
चलिए मैं अपने यादों के झरोखे से कुछ कहता हु
आप को भीगी आंखों का एक
नजराना पेश करता हूँ
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माँ तेरी याद आती है
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माँ तेरी याद आती है
मेरे दिल के तारों को छू जाती है
तुझसे मिलने को उकसा जाती है
तू जब रोज़ मुझे सपनो में जगाती है
माँ तेरी याद आजाती है
ऐसा तब क्यों न था
जब मै पास था तेरे
सायद तुझे महसूस कर न पाया था
तुझे दिल में टटोल न पाया था
तेरी जरूरत को समझ न पाया था
अब जब दूर हूँ तुझसे तो
माँ तेरी याद आती है
मेरे दिल के तारों को छू जाती है
जब मैं तुझ से बातों बातों में लड़ा करता था
हर बात पर रूठ जाया करता था
क्या पता था उस समय कि तुझसे
दूर इतना होजाऊंगा
कि तुझे याद करके भी ना रो पाउँगा
माँ तेरी याद आती है
मेरे दिल के तारों को छू जाती है
Tuesday, September 9, 2008
किसे माने सच
संचार माध्यमों द्वारा फैलाये जा रहे इस सूचना को सच मानु या झूठ
कि हमारी धरा दस घंटे बाद नष्ट हो जायेगी। आख़िर क्या है सच मुझे नहीं मालूम मैं तो इस बात को ले के हताहत हो गया हूँ कि कहाँ जायेंगे लोग, क्या करेंगे कैसे बचायेंगे अपनी जिंदगी
कि हमारी धरा दस घंटे बाद नष्ट हो जायेगी। आख़िर क्या है सच मुझे नहीं मालूम मैं तो इस बात को ले के हताहत हो गया हूँ कि कहाँ जायेंगे लोग, क्या करेंगे कैसे बचायेंगे अपनी जिंदगी
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