Friday, July 18, 2008

नशे का पैगाम आपके नाम


आज बड़ा दुःख है मुझ को, की कोई नहीं पहचानता
मै आज भी वही हूँ जो मै कल था
बस रूप बदल गया है रंग बदल गया है
जो मै करता था आज भी करता हूँ
जो मै कहता था आज भी कहता हूँ
बस नाम बदल गया है दाम बदल गया है

इस फैशन के अफरातफरी में मै भी पूजा जाता हूँ
लेकिन आज बडा दुःख है मुझको की कोई नहीं पहचानता
जान ले ये कलमनुष तू जिसने भी मुझको गले से है लगाया
पास खडी वहीं मृत्यू को ही पाया,मृत्यू को ही पाया

कहा गये वो नैन तुम्हारे जो मुझको धित्कारा करते थे
दूर से ही मेरी पहचान जान लिया करते थे
खो गया है अस्तित्वा तुम्हारा अरे मुझको क्या पहचानो गे
आज मै फिर से तुमको आपनी पहचान बतलाता हूँ
पल में नाश करू पल में मृत करू नशा मै कहलाता हूँ